माम एवांशो जीव-लो के जीव, भूत: सनातन:
मन: षष्ठानींद्रियाणि, प्रकृति स्थाणि करषति
“इस भौतिक जगत में जीव मेरे शाश्वत अंश हैं। भौतिक जीवन के कारण, मन सहित छह इंद्रियों के साथ वे बहुत अधिक संघर्ष कर रहे हैं।”
कृष्ण के गुण जीव में सूक्ष्म, परमाणु मात्रा में मौजूद हैं। सोने का एक छोटा सा भाग निश्चित रूप से सोना है, लेकिन यह एक सोने की खान के बराबर नहीं हो सकता। इसी तरह, जीवों में ईश्वर के सभी गुण सूक्ष्म मात्रा में होते हैं, लेकिन जीव कभी भी ईश्वर के समान नहीं होता है। इसलिए ईश्वर को परमेश्वर के रूप में वर्णित किया जाता है, और जीव को जीवा के रूप में वर्णित किया जाता है। ईश्वर को सभी जीवों के प्रधान, परमेश्वर के रूप में वर्णित किया गया है, क्योंकि वह दूसरों की सभी आवश्यकताओं की आपूर्ति करता है - एको बहुनाम यो विदधाति कामान। मायावादी मानते हैं कि हर कोई ईश्वर है, लेकिन भले ही इस दर्शन को स्वीकार कर लिया जाए, फिर भी कोई यह नहीं कह सकता कि हर कोई हर तरह से सर्वोच्च ईश्वर के बराबर है। केवल मूर्ख व्यक्ति ही यह मानते हैं कि हर कोई ईश्वर के बराबर है या हर कोई ईश्वर है।
