| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम » श्लोक 60 |
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| | | | श्लोक 2.23.60  | चित्र - जल्पेर दश अङ्ग - प्रजल्पादि - नाम ।
‘भ्रमर - गीता’र दश श्लोक ताहाते प्रमाण ॥60॥ | | | | | | | अनुवाद | | "पागल भावुक बातों में दस विभाग होते हैं, जिन्हें प्रजल्प और अन्य नाम कहते हैं। इसका एक उदाहरण श्रीमती राधारानी द्वारा कहे गए दस श्लोक हैं, जिन्हें 'भौंरे के लिए गीत' कहा जाता है।" | | | | "Chitrajalpa has ten divisions, known as Prajalpa and other names. Evidence of this is the ten verses spoken by Srimati Radharani, known as the Bhramar-Geet." | | ✨ ai-generated | | |
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