श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.23.59 
‘मादने’ - चुम्बनादि हय अनन्त विभेद ।
‘उद्भूर्णा’, ‘चित्र - जल्प’ - ‘मोहने’ दुई भेद ॥59॥
 
 
अनुवाद
मदन अवस्था में चुंबन तथा अन्य अनेक लक्षण होते हैं, जो असीमित हैं। मोहना अवस्था में दो भेद होते हैं - उद्घुर्णा [अस्थिरता] और चित्र-जल्प [विभिन्न प्रकार की उन्मादपूर्ण बातें]।
 
"The intoxication includes kissing and numerous other symptoms, which are countless. The intoxication state has two distinct forms: udbhurna (impermanence) and chitra-jalpa (madman-like raving)."
तात्पर्य
अधिक जानकारी के लिए, मध्य-लीला 1.87 देखें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)