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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.23.22 
कृष्ण - सम्बन्ध विना काल व्यर्थ नाहि याय ॥22॥
 
 
अनुवाद
एक क्षण भी नहीं गँवाना चाहिए। हर क्षण का उपयोग कृष्ण के लिए या उनसे जुड़ने के लिए करना चाहिए।
 
"Not a single moment should be wasted. Every moment should be used for Krishna or for things related to Him."
तात्पर्य
महाराज परीक्षित की चिंता की अभिव्यक्ति इस श्लोक में बताई गई है। वे कहते हैं, "जो कुछ भी होना तय है वह होने दो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं बस यह देखना चाहता हूं कि कृष्ण के साथ रिश्ते के बिना मेरे समय का एक भी क्षण बर्बाद न हो।" कृष्ण भक्ति के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को सहन करना पड़ता है और यह देखना पड़ता है कि जीवन का एक भी क्षण कृष्ण की सेवा के बाहर बर्बाद न हो।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)