नाना-शास्त्र-विचारणैक-निपुणौ सद-धर्म-संस्थापकौ
लोकानां हित-कारिणौ त्रि-भुवने मान्यौ शरण्याकरौ
राधा-कृष्ण-पदारविंद-भजनानंदेन मत्तालिकौ
वंदे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
"मैं छह गोस्वामियों को अपना सम्मानपूर्वक प्रणाम करता हूँ, अर्थात् श्री संतान गोस्वामी, श्री रूप गोस्वामी, श्री रघुनाथ भट्ट गोस्वामी, श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, श्री जीव गोस्वामी और श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी, जो सभी प्रकट किए गए धर्मग्रंथों का बहुत ही कुशलतापूर्वक अध्ययन करते हैं। सभी मनुष्यों के लाभ के लिए शाश्वत धार्मिक सिद्धांतों की स्थापना के उद्देश्य से। इस प्रकार वे पूरे तीनों लोकों में सम्मानित हैं और वे आश्रय लेने के योग्य हैं क्योंकि वे गोपियों के भाव में तल्लीन हैं और राधा और कृष्ण की दिव्य प्रेममय सेवा में लगे हुए हैं।"
यह कृष्ण चेतना आंदोलन छह गोस्वामियों, विशेष रूप से श्रील संतान गोस्वामी और श्रील रूप गोस्वामी की परंपरा को जारी रखता है। इस कृष्ण चेतना आंदोलन के गंभीर छात्रों को पूरी दुनिया में वृंदावन के पंथ (भगवान के लिए भक्ति सेवा) को प्रचार करने की अपनी महान जिम्मेदारी को समझना चाहिए। अब वृंदावन में हमारे पास एक अच्छा मंदिर है और गंभीर छात्रों को इसका लाभ उठाना चाहिए। मुझे बहुत उम्मीद है कि हमारे कुछ छात्र इस ज़िम्मेदारी को उठा सकते हैं और लोगों को कृष्ण चेतना में शिक्षित करके मानवता की सर्वोत्तम सेवा कर सकते हैं।
