याहार कोमल श्रद्धा, से ‘कनिष्ठ’ जन ।
क्रमे क्रमे तेंहो भक्त हड़बे ‘उत्तम’ ॥69॥
अनुवाद
"जिसकी आस्था कोमल और लचीली होती है, उसे नवदीक्षित कहा जाता है, लेकिन धीरे-धीरे इस प्रक्रिया का अनुसरण करने से वह प्रथम श्रेणी के भक्त के स्तर तक पहुंच जाता है।
One whose faith is soft and flexible is called a junior devotee. However, by following the prescribed method step by step, he attains the status of a first-class (superior) devotee.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)