श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 22: भक्ति की विधि  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  2.22.69 
याहार कोमल श्रद्धा, से ‘कनिष्ठ’ जन ।
क्रमे क्रमे तेंहो भक्त हड़बे ‘उत्तम’ ॥69॥
 
 
अनुवाद
"जिसकी आस्था कोमल और लचीली होती है, उसे नवदीक्षित कहा जाता है, लेकिन धीरे-धीरे इस प्रक्रिया का अनुसरण करने से वह प्रथम श्रेणी के भक्त के स्तर तक पहुंच जाता है।
 
One whose faith is soft and flexible is called a junior devotee. However, by following the prescribed method step by step, he attains the status of a first-class (superior) devotee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)