श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 22: भक्ति की विधि  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.22.65 
शास्त्र - युक्त्ये सुनिपुण, दृढ़ - श्रद्धा याँर।
‘उत्तम - अधिका री’ सेइ तारये संसार ॥65॥
 
 
अनुवाद
"जो तर्क, तर्क और शास्त्रों में निपुण है और कृष्ण में दृढ़ विश्वास रखता है, वह सर्वोच्च भक्त माना जाता है। वह समस्त जगत का उद्धार कर सकता है।"
 
One who is well versed in logic and authoritative scriptures and has firm faith in Krishna is considered a supreme devotee. He can save the entire world.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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