सहज सेवा कृत्रिम नहीं है। उस स्तर तक पहुँचने के लिए, व्यक्ति को केवल नियमित सिद्धांतों के अनुसार भक्ति-भावना अर्पित करनी होती है। इसलिए व्यक्ति को मंदिर को साफ करने, स्वयं को शुद्ध करने, तड़के उठने, मंगला-आरती में शामिल होने आदि द्वारा सुनने और जप करने का अभ्यास करना होता है और अन्य नियमित सिद्धांतों का पालन करना होता है। यदि व्यक्ति प्रारंभ में सहज सेवा के स्तर तक नहीं आ पाता है, तो उसे आध्यात्मिक गुरु के निर्देशों के अनुसार, नियमित सेवा अपनानी चाहिए। इस नियमित सेवा को वैधी भक्ति कहते हैं।
