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अनुवाद
"जब दिव्य भक्ति, जिसके द्वारा कृष्ण-प्रेम प्राप्त होता है, इंद्रियों द्वारा की जाती है, तो उसे साधना-भक्ति या भक्ति का नियमित निर्वहन कहते हैं। ऐसी भक्ति प्रत्येक जीव के हृदय में नित्य विद्यमान रहती है। इस नित्य भक्ति का जागरण ही व्यवहार में भक्ति की सामर्थ्य है।"
"The divine devotion that leads to love for Krishna, if accomplished through the senses, is called Sadhana Bhakti. Such devotion resides constantly within the heart of every living being. The emergence of this eternal devotion is the fruit attained through Sadhana Bhakti."
तात्पर्य
यह ऋचा भक्ति-रसामृत-सिंधु (1.2.2) में पायी जाती है। क्योंकि जीव सूक्ष्म होते हैं, परमेश्वर के अणु और पार्सल है, भक्ति सेवा उनमें पहले से ही निष्क्रिय अवस्था में मौजूद होती है। भक्ति सेवा श्रवणं कीर्तनम, श्रवण और चान्टिंग से आरंभ होती है। जब व्यक्ति सो रहा होता है, तो वह ध्वनि कम्पन द्वारा जाग सकता है; इसलिए प्रत्येक मानव आत्मा को शुद्ध वैष्णव द्वारा चान्ट किए जाने वाले हरे कृष्ण मंत्र को सुनने का मौका दिया जाना चाहिए। जो व्यक्ति इस प्रकार कंपित होने वाले हरे कृष्ण मंत्र को सुनता है, वह आध्यात्मिक चेतना, या कृष्ण चेतना के लिए जागृत होता है। इस प्रकार व्यक्ति का मन धीरे-धीरे शुद्ध हो जाता है, जिसका उल्लेख श्री चैत्न्य महाप्रभु (चेतो-दर्पण-मार्जनम) द्वारा किया गया है। जब मन शुद्ध हो जाता है, तो इंद्रियां भी शुद्ध हो जाती हैं। इंद्रियों का उपयोग भोग-विलास के लिए करने की बजाय, जागृत भक्त इंद्रियों का उपयोग भगवान की अलौकिक प्रेममयी सेवा में करता है। यही वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कृष्ण के लिए निष्क्रिय प्रेम को जागृत किया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥