श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.21.88 
तस्याः पारे पर - व्योम त्रिपाद्भूतं सनातनम् ।
अमृतं शाश्वतं नित्यमनन्तं परमं पदम् ॥88॥
 
 
अनुवाद
विरजा नदी के पार आध्यात्मिक प्रकृति है, जो अविनाशी, शाश्वत, अक्षय और असीमित है। यह परम धाम है, जिसमें भगवान के तीन-चौथाई ऐश्वर्य समाहित हैं। इसे परव्योम, अर्थात् आध्यात्मिक आकाश कहते हैं।
 
"On the other side of the Viraja River is the spiritual nature, which is indestructible, eternal, imperishable, and limitless. This is the supreme abode, in which three-fourths of the Lord's glory resides. This is called Paravyoma, the spiritual sky."
तात्पर्य
यह पदम पुराण से एक श्लोक है जिसे भगवान कृष्ण ने यहाँ उद्धृत किया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)