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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य
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श्लोक 78
श्लोक
2.21.78
द्वारकादि - विभु, तार एइ त प्रमाण ।
‘आमार - इ ब्रह्माण्डे कृष्ण’ सबार हैल ज्ञान ॥78॥
अनुवाद
“यह द्वारका के ऐश्वर्य का प्रमाण है: सभी ब्रह्माओं ने सोचा, ‘कृष्ण अब मेरे अधिकार क्षेत्र में रह रहे हैं।’
“This is the proof of the splendor of Dwaraka: all the Brahmas thought, ‘Now Krishna is present in my region.’”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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