श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  2.21.57 
त्रिपाद - विभूति कृष्णेर - वाक्य - अगोचर ।
एक - पाद विभूतिर शुनह विस्तार ॥57॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण की शक्ति का तीन-चौथाई भाग हमारी वाणी से परे है। अतः आइए हम उनकी शेष एक-चौथाई शक्ति के बारे में विस्तार से सुनें।
 
"Three-fourths of the Lord's power is beyond our ability to describe. So, listen in detail about the remaining one-fourth of His power."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)