vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य
»
श्लोक 57
श्लोक
2.21.57
त्रिपाद - विभूति कृष्णेर - वाक्य - अगोचर ।
एक - पाद विभूतिर शुनह विस्तार ॥57॥
अनुवाद
भगवान कृष्ण की शक्ति का तीन-चौथाई भाग हमारी वाणी से परे है। अतः आइए हम उनकी शेष एक-चौथाई शक्ति के बारे में विस्तार से सुनें।
"Three-fourths of the Lord's power is beyond our ability to describe. So, listen in detail about the remaining one-fourth of His power."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×