श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.21.42 
एइ अर्थ - मध्यम, शुन ‘गूढ़’ अर्थ आर ।
तिन आवास - स्थान कृष्णेर शास्त्रे ख्याति यार ॥42॥
 
 
अनुवाद
"यह मध्य अर्थ है। अब कृपया गोपनीय अर्थ सुनें। भगवान कृष्ण के तीन निवास स्थान हैं, जो शास्त्रों से सुविदित हैं।
 
"This is the middle meaning. Now listen to its deep meaning. Lord Krishna has three abodes, which are well known from the authentic scriptures."
तात्पर्य
कृष्ण के तीन वास हैं - उनका आंतरिक वास (गोलोक वृंदावन), उनका मध्यवर्ती वास (आध्यात्मिक आकाश) और उनका बाह्य वास (यह भौतिक संसार)।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)