श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.21.31 
ऐश्वर्य कहिते स्फुरिल ऐश्वर्य - सागर ।
मनेन्द्रिय डुबिला, प्रभु हुइला फाँपर ॥31॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण के दिव्य ऐश्वर्यों का वर्णन करते समय श्री चैतन्य महाप्रभु के मन में ऐश्वर्य का सागर प्रकट हुआ और उनका मन तथा इन्द्रियाँ उस सागर में डूब गईं। इस प्रकार वे व्याकुल हो गए।
 
"As Sri Chaitanya Mahaprabhu described the transcendental opulence of Krishna, a sea of ​​opulence surged within his mind, and his mind and senses were immersed in that ocean. He became distraught."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)