श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.21.128 
कर - नख - चान्देर हाट, वंशी - उपर करे नाट
तार गीत मुरलीर तान ।
पद - नख - चन्द्र - गण, तले करे नर्तन
नूपुरेर ध्वनि यार गान ॥128॥
 
 
अनुवाद
"उनके नाखून कई पूर्णिमा के समान हैं, और वे उनके हाथों में बंधी बांसुरी पर नाचते हैं। उनका गीत उस बांसुरी की धुन है। उनके पैर के नाखून भी कई पूर्णिमा के समान हैं, और वे ज़मीन पर नाचते हैं। उनका गीत उनके घुंघरूओं की झंकार है।"
 
"The nails of his hands are many full moons, and they dance to the flute in his hand. His song is the tune of that flute. The nails of his feet are also many full moons, which dance on the ground. His song is the tinkling of his anklets."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)