ब्रह्मादि रहु - सहस्र - वदने ‘अनन्त’ ।
निरन्तर गाय मुखे, ना पाय गुणेर अन्त ॥12॥
अनुवाद
भगवान ब्रह्मा की तो बात ही क्या, यहाँ तक कि भगवान अनन्त, जिनके हजारों सिर हैं, वे भी भगवान के दिव्य गुणों के अंत तक नहीं पहुँच सकते, भले ही वे निरंतर उनकी स्तुति करते रहें।
“Forget about Lord Brahma, even the thousand-headed Lord Ananta cannot surpass the transcendental qualities of the Lord, although he constantly sings His glories.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥