योगमाया चिच्छक्ति, विशुद्ध - सत्त्व - परिणति
तार शक्ति लोके देखाइते ।
एइ रूप - रतन, भक्त - गणेर गूढ़ - धन
प्रकट कैला नित्य - लीला हैते ॥103॥
अनुवाद
"कृष्ण का दिव्य रूप भगवान कृष्ण की आंतरिक आध्यात्मिक ऊर्जा द्वारा संसार को दिखाया जाता है, जो शुद्ध सत्व का रूपांतरण है। यह रत्नमय रूप भक्तों का परम गोपनीय कोष है। यह रूप कृष्ण की शाश्वत लीलाओं से प्रकट होता है।
"Lord Krishna's divine form is revealed to the world through His inner power. This power is a transformation of pure Sattva. This jewel-like form is the devotees' deepest treasure. This form is revealed through Krishna's eternal pastimes."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥