कृष्णेर यतेक खेला, सर्वोत्तम नर - लीला ,
नर - वपु ताहार स्वरूप ।
गोप - वेश, वेणु - कर, नव - किशोर ,
नट - वर, नर - लीलार हय अनुरूप ॥101॥
अनुवाद
"भगवान कृष्ण की अनेक लीलाएँ हैं, जिनमें से मानव रूप में उनकी लीलाएँ सर्वश्रेष्ठ हैं। उनका मानव रूप सर्वोच्च दिव्य रूप है। इस रूप में वे एक ग्वालबाल हैं। उनके हाथ में बाँसुरी है और उनका यौवन नवीन है। वे एक कुशल नर्तक भी हैं। यह सब उनकी मानव लीलाओं के लिए उपयुक्त है।"
"Lord Krishna has many pastimes, the most exemplary of which are his human pastimes. His human form is the quintessential divine form. In this form, he is a cowherd boy. He holds a flute in his hand, and his adolescence remains ever-fresh. He is also an accomplished dancer.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥