श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.20.81 
सनातन कहे, - “आमि माधुकरी करिब ।
ब्राह्मणेर घरे केने एकत्र भिक्षा लब ?” ॥81॥
 
 
अनुवाद
सनातन ने उत्तर दिया, "मैं मधुकरी का अभ्यास करूँगा। मैं ब्राह्मण के घर में पूर्ण भोजन क्यों ग्रहण करूँ?"
 
Sanatana replied, "I will follow the Madhukari method. Why should I accept a full meal at a Brahmin's house?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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