श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 373
 
 
श्लोक  2.20.373 
ज्ञान - शक्त्यादि - कलया यत्राविष्टो जनार्दनः ।
त आवेशा निगद्यन्ते जीवा एव महत्तमाः ॥373॥
 
 
अनुवाद
“जब भी भगवान अपनी विभिन्न शक्तियों के अंशों द्वारा किसी में उपस्थित होते हैं, तो भगवान का प्रतिनिधित्व करने वाले जीव को शक्तिवेश-अवतार कहा जाता है - अर्थात, विशेष शक्ति से संपन्न अवतार।’
 
“Whenever the Lord is present in someone as a part of His various powers, that being is called Shaktivesha avatar.
तात्पर्य
ये पद्य लघु भागवतामृत (1.18) में पाया जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)