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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 372
 
 
श्लोक  2.20.372 
शेषे ‘स्व - सेवन’ - शक्ति, पृथुते ‘पालन’ ।
परशुरामे ‘दुष्ट - नाशक - वीर्य - सञ्चार ण’ ॥372॥
 
 
अनुवाद
"परम पुरुषोत्तम भगवान ने भगवान शेष को व्यक्तिगत सेवा की शक्ति प्रदान की और उन्होंने राजा पृथु को पृथ्वी पर शासन करने की शक्ति प्रदान की। भगवान परशुराम को दुष्टों और दुराचारियों का वध करने की शक्ति प्राप्त हुई।
 
"The Supreme Personality of Godhead bestowed the power of personal service upon Lord Sesha and the power of ruling the earth upon King Prithu. Lord Parashurama was granted the power to slay all the wicked and the wicked.
तात्पर्य
श्रीमद्भगवद् गीता (4.8) में कृष्ण कहते हैं, परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च दुष्कृताम। कभी-कभी प्रभु अपने शासन की शक्ति को पृथु जैसे राजा में निहित कर देते हैं और ऐसे राजा को दुष्टों और पापियों का नाश करने के लिए सक्षम बनाते हैं। वे परशुराम जैसे अवतारों में भी अपनी शक्ति का निवेश करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)