श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 358
 
 
श्लोक  2.20.358 
भागवतारम्भे व्यास मङ्गलाचरणे ।
‘परमेश्वर’ निरूपिल एइ दुइ लक्षणे ॥358॥
 
 
अनुवाद
श्रीमद्भागवत के प्रारम्भ में मंगलमय प्रार्थना में श्रील व्यासदेव ने इन लक्षणों द्वारा भगवान का वर्णन किया है।
 
“In the Mangalacharan of Srimad Bhagavatam, Srila Veda Vyasa has described the Supreme Personality of Godhead through these very characteristics.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)