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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 354
 
 
श्लोक  2.20.354 
अवतार नाहि कहे - ‘आमि अवता र’ ।
मुनि सब जानि’ करे लक्षण - विचार ॥354॥
 
 
अनुवाद
“ईश्वर का वास्तविक अवतार कभी नहीं कहता कि ‘मैं ईश्वर हूँ’ या ‘मैं ईश्वर का अवतार हूँ।’ महान ऋषि व्यासदेव ने, जो सब कुछ जानते हैं, पहले ही शास्त्रों में अवतारों की विशेषताओं को दर्ज कर दिया है।
 
“The true incarnation of God never says, ‘I am God or I am the incarnation of God.’ Knowing all this, the great sage Vyasadeva has already mentioned the characteristics of incarnations in the scriptures.
तात्पर्य
इस श्लोक मे स्पष्ट कहा गया है कि भगवान के एक वास्तविक अवतार, कभी यह दावा नही करते कि वे वास्तविक अवतार है। शास्त्र मे वर्णित लक्षण के अनुसार समझ सकते है कि कौन अवतार है और कौन नहीं
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)