श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.20.32 
गोसाञि कहे, - “केह द्रव्य लइबे आमा मा रि’ ।
आमार प्राण रक्षा कर द्रव्य अङ्गीकरि” ॥32॥
 
 
अनुवाद
सनातन गोस्वामी ने उत्तर दिया, "यदि आप इन सिक्कों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो कोई और इनके लिए मुझे मार डालेगा। बेहतर होगा कि आप सिक्के स्वीकार करके मुझे खतरे से बचाएँ।"
 
Sanatana Goswami said, "If you don't accept these coins, someone else will kill me for them. Therefore, it would be better if you accept these coins and save my life."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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