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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 318
 
 
श्लोक  2.20.318 
सृजामि तन्नियुक्तोऽहं हरो हरति तद्वशः ।
विश्वं पुरुष - रूपेण परिपाति त्रि - शक्ति - धृक् ॥318॥
 
 
अनुवाद
[भगवान ब्रह्मा ने कहा:] 'मैं भगवान द्वारा सृष्टि करने के लिए नियुक्त हूँ। उनकी आज्ञा का पालन करते हुए, भगवान शिव सब कुछ विलीन कर देते हैं। भगवान अपने क्षीरोदकशायी विष्णु रूप में प्रकृति के समस्त कार्यों का पालन करते हैं। इस प्रकार प्रकृति के तीनों गुणों के परम नियंत्रक भगवान विष्णु हैं।'
 
“[Brahma said:] ‘The Supreme Personality of Godhead has appointed me to create. Lord Shiva, obeying His orders, destroys everything. As Kshirodakasayi Vishnu, the Supreme Personality of Godhead, controls all the activities of nature. Thus, Lord Vishnu is the supervisor of the three modes of material nature.’
तात्पर्य
यह श्रीमद् भागवतम (2.6.32) का उद्धरण है। भगवान ब्रह्मा ने देवर्षि नारद को यह जानकारी तब दी जब वह भगवान ब्रह्मा से सर्वोच्च भगवान, परमात्मा को समझने के लिए निर्देश प्राप्त कर रहे थे। भगवान के सार्वभौमिक रूप का वर्णन करने के बाद, भगवान ब्रह्मा ने समझाया कि उनकी स्थिति और भगवान शिव की स्थिति भगवान विष्णु द्वारा नियंत्रित की जाती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)