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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 309
 
 
श्लोक  2.20.309 
दुग्ध ग्रेन अम्ल - योगे दधि - रूप धरे ।
दुग्धान्तर वस्तु नहे, दुग्ध हैते नारे ॥309॥
 
 
अनुवाद
"दूध दही संस्कृति के साथ जुड़कर दही में बदल जाता है। इस प्रकार दही कुछ और नहीं बल्कि दूध है, लेकिन फिर भी वह दूध नहीं है।"
 
"When curd is added to milk, it turns into curd. Thus, curd is milk, yet it is not milk.
तात्पर्य
ब्रह्मांड के सृजन, पालन और विनाश के निरीक्षण करने वाले तीन देवताओं में से भगवान विष्णु कभी भी मूल विष्णु से भिन्न नहीं रहते हैं। हालाँकि, भगवान शिव और ब्रह्मा अपनी माया से जुड़े होने के कारण विष्णु से भिन्न हैं। विष्णु को भौतिक ऊर्जा के किसी भी रूप में नहीं बदला जा सकता है। जब भी माया से जुड़ाव होता है, तो उससे जुड़ा व्यक्तित्व भगवान विष्णु से अवश्य ही भिन्न होता है। इसलिए भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा को गुण-अवतार कहा जाता है, क्योंकि वे भौतिक गुणों से जुड़ते हैं। निष्कर्ष यह है कि रुद्र वास्तव में भगवान विष्णु नहीं हैं बल्कि विष्णु का रूपांतरण हैं। इसलिए वे विष्णु-तत्वों की श्रेणी में नहीं आते हैं। इस प्रकार वे विष्णु के साथ एक हैं और उनसे भिन्न हैं। इस पद में दिया गया उदाहरण बहुत स्पष्ट है। दूध की तुलना विष्णु से की गई है। जैसे ही दूध किसी खट्टी चीज को छूता है, यह दही या भगवान शिव बन जाता है। हालाँकि दही रूप से दूध है, किंतु इसे दूध के स्थान पर नहीं लिया जा सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)