Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 303
 
 
श्लोक  2.20.303 
गर्भोदकशायि - द्वारा शक्ति सञ्चा रि’ ।
व्यष्टि सृष्टि करे कृष्ण ब्रह्मा - रूप ध रि’ ॥303॥
 
 
अनुवाद
"ऐसा भक्त गर्भोदकशायी विष्णु द्वारा शक्ति प्राप्त करता है। इस प्रकार, ब्रह्मा के रूप में कृष्ण का अवतार ब्रह्मांड की संपूर्ण रचना का संचालन करता है।"
 
"Such a devotee is granted power by Garbhodakasayi Vishnu. Thus, Krishna's incarnation as Brahma creates the entire universe.
तात्पर्य
गर्भोदकशासी विष्णु पुरुष अवतार विष्णु भगवान का विस्तार भौतिक गुणों - सत्व-गुण, रजो-गुण और तमो-गुण को स्वीकार करता है - और इस तरह भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव के रूप में अवतार लेता है। यह भौतिक गुणों का अवतार है। कई श्रेष्ठ जीवों के बीच पवित्र कर्मों और भक्ति सेवा की योग्यता के साथ, एक, जिसे भगवान ब्रह्मा कहा जाता है, गर्भोदकशासी विष्णु की सर्वोच्च इच्छा से जुनून की गुणवत्ता से प्रभावित है। इस प्रकार भगवान ब्रह्मा भगवान की रचनात्मक ऊर्जा के अवतार बन जाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)