‘विष्णु’ - रूप ह ञा करे जगत्पालने ।
गुणातीत विष्णु - स्पर्श नाहि माया - सने ॥289॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
"इस प्रकार, भगवान विष्णु रूप में समस्त भौतिक जगत का पालन करते हैं। चूँकि वे सदैव भौतिक गुणों से परे हैं, इसलिए भौतिक प्रकृति उन्हें स्पर्श नहीं कर सकती।
"Thus, in His Vishnu form, the Supreme Personality of Godhead maintains the entire material universe. Since He is always beyond the material qualities, material nature (maya) can never touch Him.
तात्पर्य
भौतिक ऊर्जा का प्रभाव भगवान विष्णु को नहीं छू सकता जैसे यह भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव को छूती है। इसलिए यह कहा जाता है कि भगवान विष्णु भौतिक गुणों से परे हैं। भौतिक गुणों के अवतार - भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा - बाह्य ऊर्जा के अधीन हैं। हालाँकि, भगवान विष्णु अलग हैं। ऋग्वेद के मंत्रों में कहा गया है, ॐ तद विष्णोः परमं पदम (ऋग्वेद-संहिता 1.22.20)। परमं पदम शब्द इंगित करते हैं कि वह भौतिक गुणों से परे हैं। क्योंकि भगवान विष्णु भौतिक गुणों के अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं, इसलिए वह हमेशा उन जीवित संस्थाओं से श्रेष्ठ हैं जो भौतिक ऊर्जा द्वारा नियंत्रित हैं। यह सर्वोच्च भगवान और जीवित संस्थाओं के बीच का एक अंतर है। भगवान ब्रह्मा एक बहुत शक्तिशाली जीवित संस्था हैं, और भगवान शिव उनसे भी अधिक शक्तिशाली हैं। इसलिए भगवान शिव को एक जीवित संस्था के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है, लेकिन साथ ही उन्हें भगवान विष्णु के स्तर पर भी नहीं माना जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥