काल - वृत्त्या तु मायायां गुण - मय्यामधोक्षजः ।
पुरुषेणात्म - भूतेन वीर्घमाधत्त वीर्यवान् ॥275॥
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अनुवाद
“‘समय आने पर, भगवान [महा-वैकुंठनाथ] ने अपने व्यक्तिगत स्व [महा-विष्णु] के विस्तार के माध्यम से, भौतिक प्रकृति के गर्भ में जीवों का बीज स्थापित किया।’
“In the course of time, the Supreme Personality of Godhead (Maha Vaikunthanath) established the semen of the living entity within the womb of the material nature through the expansion of His breath (Maha Vishnu).
तात्पर्य
यह श्रीमद भागवतम् (३.५.२६) से उद्धृत है। यह छंद बताता है कि जीवित प्राणी भौतिक प्रकृति के संपर्क में कैसे आते हैं। जिस प्रकार एक स्त्री पुरुष से मिले बिना बच्चे को जन्म नहीं दे सकती, उसी प्रकार भौतिक प्रकृति भगवान के साथ संपर्क में आए बिना जीवित प्राणियों को जन्म नहीं दे सकती। इस बात का इतिहास है कि कैसे परमेश्वर सभी जीवित प्राणियों का पिता बनता है। हर धर्म व्यवस्था में, यह स्वीकार किया जाता है कि ईश्वर सभी जीवित प्राणियों का सर्वोच्च पिता है। ईसाई धर्म के अनुसार, सर्वोच्च पिता, ईश्वर, जीवित प्राणियों को जीवन की सभी ज़रूरतें प्रदान करता है। इसलिए वे प्रार्थना करते हैं, "हमें आज हमारी रोज़ी दो।" कोई भी धर्म जो सर्वोच्च भगवान को निरपेक्ष पिता के रूप में स्वीकार नहीं करता है, उसे कैतव-धर्म या धोखाधड़ी वाला धर्म कहा जाता है। ऐसी धार्मिक व्यवस्थाओं को श्रीमद भागवतम् (१.१.२) में अस्वीकार कर दिया गया है: धर्मः प्रोज्जित-कैतवो 'त्र। सर्वशक्तिमान सर्वोच्च पिता को केवल नास्तिक ही स्वीकार नहीं करता है। यदि कोई सर्वशक्तिमान परम पिता को स्वीकार कर लेता है, तो वह उसके आदेशों का पालन करता है और एक धार्मिक व्यक्ति बन जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥