श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 254
 
 
श्लोक  2.20.254 
इच्छा - ज्ञान - क्रिया विना ना हय सृजन ।
तिनेर तिन - शक्ति मे लि’ प्रपञ्च - रचन ॥254॥
 
 
अनुवाद
"विचार, भावना, इच्छा, ज्ञान और क्रिया के बिना सृजन की कोई संभावना नहीं है। परम इच्छा, ज्ञान और क्रिया का संयोजन ही ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति को जन्म देता है।"
 
"Creation is not possible without thought, experience, desire, knowledge, and action. The vast universe is created by the union of supreme desire, knowledge, and action."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas