श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 247
 
 
श्लोक  2.20.247 
बाल्य, पौगण्ड हय विग्रहेर धर्म ।
एत - रूपे लीला करेन व्रजेन्द्र - नन्दन ॥247॥
 
 
अनुवाद
"बाल्यावस्था और बाल्यावस्था भगवान की विशिष्ट आयु है। महाराज नंद के पुत्र कृष्ण ने बाल अवस्था और बालक अवस्था में अपनी लीलाएँ कीं।
 
"The Deity has distinct stages: childhood and adolescence. Lord Krishna, son of Maharaja Nanda, performed His divine acts as an infant and a child.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)