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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 242
 
 
श्लोक  2.20.242 
चत्वारो वासुदेवाद्या नारायण - नृसिंहकौ ।
हयग्रीवो महाक्रोड़ो ब्रह्मा चेति नवोदिताः ॥242॥
 
 
अनुवाद
"'उल्लेखित नौ व्यक्तित्व हैं वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, नारायण, नृसिंह, हयग्रीव, वराह और ब्रह्मा।'
 
The nine persons mentioned are Vasudeva, Sankarshana, Pradyumna, Aniruddha, Narayana, Narasimha, Hayagriva, Varaha and Brahma.
तात्पर्य
यह पद लघु-भागवतामृत (1.४५१) में पाया जाता है। यहाँ वर्णित ब्रह्मा कोई जीवित प्राणी नहीं है। कभी-कभी, जब ब्रह्मा के पद का दायित्व लेने के लिए जीवों की कमी हो जाती है, तो महाविष्णु स्वयं भगवान ब्रह्मा के रूप में विस्तारित होते हैं। इस ब्रह्मा को एक जीवित प्राणी नहीं माना जाता है; वह विष्णु का विस्तार है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)