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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 237
 
 
श्लोक  2.20.237 
हयशीर्ष - पञ्चरात्रे कहे षोल - जन ।
तार मते कहि एबे चक्रादि - धारण ॥237॥
 
 
अनुवाद
"हयशीर्षपंचरात्र के अनुसार सोलह पुरुष हैं। अब मैं उनके शस्त्र धारण करने के तरीके का वर्णन करूँगा।"
 
"According to the Hayashirsha Pancharatra, there are sixteen Purusha. I will now describe that view and how they carry their weapons.
तात्पर्य
सोलह व्यक्तित्व इस प्रकार हैं: (1) वासुदेव, (2) संकर्षण, (3) प्रद्युम्न, (4) अनिरुद्ध, (5) केशव, (6) नारायण, (7) माधव, (8) गोविंद, (9) विष्णु, (10) मधुसूदन, (11) त्रिविक्रम, (12) वामन, (13) श्रीधर, (14) हृषीकेश, (15) पद्मनाभ और (16) दामोदर।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)