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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 223
 
 
श्लोक  2.20.223 
सिद्धार्थ - संहिता करे चब्बिश मूर्ति गणन ।
तार मते कहि आगे चक्रादि - धारण ॥223॥
 
 
अनुवाद
"सिद्धार्थ-संहिता के अनुसार भगवान विष्णु के चौबीस रूप हैं। सबसे पहले मैं उस ग्रंथ के मतानुसार चक्र से आरंभ करते हुए, अस्त्रों के स्थान का वर्णन करूँगा।"
 
"According to the Siddhartha Samhita, Lord Vishnu has twenty-four forms. First, I will describe the positions of these weapons, starting with the Chakra, according to that text.
तात्पर्य
चौबीस रूप ये हैं: (1) वासुदेव, (2) संकर्षण, (3) प्रद्युम्न, (4) अनिरुद्ध, (5) केशव, (6) नारायण, (7) माधव, (8) गोविंद, (9) विष्णु, (10) मधुसूदन, (11) त्रिविक्रम, (12) वामन, (13) श्रीधर, (14) हृषीकेश, (15) पद्मनाभ, (16) दामोदर, (17) पुरुषोत्तम, (18) अच्युत, (19) नृसिंह, (20) जनार्दन, (21) हरि, (22) कृष्ण, (23) अधोक्षज और (24) उपेंद्र।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)