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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 219
 
 
श्लोक  2.20.219 
सर्वत्र प्रकाश ताँर - भक्ते सुख दिते ।
जगतेर अधर्म नाशि’ धर्म स्थापिते ॥219॥
 
 
अनुवाद
"भगवान अपने भक्तों को प्रसन्न करने के लिए ही समस्त ब्रह्माण्डों में विभिन्न रूपों में स्थित हैं। इस प्रकार भगवान अधार्मिक सिद्धांतों का नाश करके धार्मिक सिद्धांतों की स्थापना करते हैं।"
 
"The Lord exists in various forms throughout the universe to please His devotees. In this way, the Lord destroys unrighteousness and establishes righteousness.
तात्पर्य
भौतिक जगत में, भगवान मंदिरों में विभिन्न अर्चा-मूर्तियों (देवताओं) में बसते हैं ताकि दासता में पड़ी आत्मा की भौतिक गतिविधियों को घटाएँ और उसकी आध्यात्मिक गतिविधियों को बढ़ाएँ। विशेष रूप से भारत में पूरे देश में कई मंदिर हैं। भक्त उनका लाभ उठा सकते हैं और जगन्नाथ पुरी, वृंदावन, प्रयाग, मथुरा, हरिद्वार और विष्णुकांची में भगवान के दर्शन कर सकते हैं। जब भक्त इन स्थानों की यात्रा करते हैं और भगवान को देखते हैं, तो वे भक्ति सेवा में बहुत खुश होते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)