श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.20.190 
कृष्णेर एइ चारि प्राभव - विलास ।
द्वारका - मथुरा - पुरे नित्य इँहार वास ॥190॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण के ये चार प्रभावशाली लीला रूप द्वारका और मथुरा में नित्य निवास करते हैं।
 
“These four forms of Lord Krishna reside eternally in Dwaraka and Mathura.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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