श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.20.17 
तथा एक भौमिक हय, तार ठाञि गेला ।
‘पर्वत पार कर आ मा’ - विनति करिला ॥17॥
 
 
अनुवाद
पाटाडा पहुंचने पर उनकी मुलाकात एक जमींदार से हुई और उन्होंने विनम्रतापूर्वक उनसे पहाड़ी रास्ते से पार कराने का अनुरोध किया।
 
Reaching Patada, they met a landlord and requested him to help them cross this hilly area.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)