श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  2.20.154 
ईश्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानन्द - विग्रहः ।
अनादिरादिर्गोविन्दः सर्व - कारण - कारणम् ॥154॥
 
 
अनुवाद
"कृष्ण, जो गोविंद कहलाते हैं, परम नियन्ता हैं। उनका एक शाश्वत, आनंदमय, आध्यात्मिक शरीर है। वे ही सबके मूल हैं। उनका कोई अन्य मूल नहीं है, क्योंकि वे ही समस्त कारणों के आदि कारण हैं।"
 
"Krishna, known as Govinda, is the supreme controller. His body is eternal, blissful, and spiritual. He is the origin of all. He has no other origin, for He is the primary cause of all causes."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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