श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.20.151 
दशमे दशमं लक्ष्यमाश्रिताश्रय - विग्रहम् ।
श्री कृष्णाख्यं परं धाम जगद्धाम नमामि तत् ॥151॥
 
 
अनुवाद
श्रीमद्भागवतम् का दशम स्कन्ध दसवें तत्व, भगवान् का, जो समस्त शरणागतात्माओं के आश्रय हैं, प्रकटीकरण करता है। वे श्रीकृष्ण कहलाते हैं और समस्त ब्रह्माण्डों के मूल हैं। मैं उन्हें नमस्कार करता हूँ।
 
"The tenth canto of the Srimad Bhagavatam reveals the tenth goal, the Supreme Personality of Godhead, the refuge of all who surrender to Him. He is known by the name Sri Krishna and is the ultimate source of all universes. I offer my respectful obeisances to Him."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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