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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 149
श्लोक
2.20.149
कृष्णेर स्वरूप - अनन्त, वैभव - अपार ।
चिच्छक्ति, माया - शक्ति, जीव - शक्ति आर ॥149॥
अनुवाद
"भगवान कृष्ण का दिव्य रूप असीम है और उसमें असीम ऐश्वर्य भी है। उनमें आंतरिक शक्ति, बाह्य शक्ति और सीमांत शक्ति है।
"Krishna's divine form is infinite, and His opulence is boundless. He is the master of internal, external, and neutral powers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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