श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.20.121 
दैवी ह्ये षा गुण - मयी मम माया दुरत्यया ।
मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥121॥
 
 
अनुवाद
"'भौतिक प्रकृति के तीन गुणों से युक्त मेरी यह दिव्य शक्ति, पार करना कठिन है। किन्तु जो मेरी शरण में आ गए हैं, वे इसे आसानी से पार कर सकते हैं।'
 
"This divine energy of Mine, consisting of the three modes of material nature, is difficult to transcend. But those who have surrendered to Me can easily transcend it."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)