श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.20.12 
अनेक देखिल, तार ला ग् ना पाइल ।
दाडुका - सहित डुबि काहाँ वहि’ गेल ॥12॥
 
 
अनुवाद
“उससे कहो, ‘मैंने उसे बहुत देर तक ढूँढ़ा, पर उसका कोई पता नहीं चला। वह अपनी बेड़ियाँ समेत पानी में कूद गया, इसलिए डूब गया और लहरों में बह गया।’
 
"Tell him, 'I searched for him for a long time, but couldn't find him. He jumped in with his handcuffs on, so he drowned and was swept away by the waves.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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