श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.20.101 
कृपा करि’ यदि मोरे करियाछ उद्धार ।
आपन - कृपाते कह कर्तव्य’ आमार ॥101॥
 
 
अनुवाद
"आपने अपनी अहैतुकी कृपा से मुझे सांसारिक मार्ग से मुक्त कर दिया है। अब उसी अहैतुकी कृपा से मुझे मेरा कर्तव्य बताइए।"
 
You have delivered me from the path of materialism by your causeless grace. Now, by that same causeless grace, please tell me about my duty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)