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श्लोक 2.19.94  |
शुनि’ आनन्दित हैल उपाध्यायेर मन ।
प्रभु ताँरे कहिल , - ‘कह कृष्णेर वर्णन’ ॥94॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान के आशीर्वाद सुनकर रघुपति उपाध्याय बहुत प्रसन्न हुए। तब भगवान ने उनसे कृष्ण का वर्णन करने को कहा। |
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| Raghupati Upadhyaya was very pleased to hear Mahaprabhu's blessings. Mahaprabhu then asked him to describe Krishna. |
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