श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा श्रील रूप गोस्वामी को उपदेश  »  श्लोक 256
 
 
श्लोक  2.19.256 
श्रद्धा करि’ एइ कथा शुने येइ जने ।
प्रेम - भक्ति पाय सेइ चैतन्य - चरणे ॥256॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भी इस कथा को श्रद्धा और प्रेम के साथ सुनता है, उसे श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणकमलों में अवश्य ही भगवद्प्रेम हो जाता है।
 
Whoever listens to this story with devotion and love, definitely develops love for the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)