भोक्तारं यज्ञ-तपसां सर्व-लोक-महेश्वरम्
सुहृदं सर्व-भूतानां ज्ञात्वा माम शान्ति ऋच्छति
"मुझे अपने पूर्ण चेतना में जानने वाला, मुझे सभी बलिदानों और तपस्याओं का अंतिम लाभार्थी जानने वाला, सभी ग्रहों और देवताओं का सर्वोच्च भगवान, और सभी जीवित संस्थाओं का हितैषी और शुभचिंतक, भौतिक दुखों की पीड़ा से शांति प्राप्त करता है।"
कर्मियों, ज्ञानियों और योगियों के लिए अनुसंधान चल रहा है, लेकिन जब तक खोज पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी शांति प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए भगवद-गीता कहती है, ज्ञात्वा माम शान्ति ऋच्छति: कोई व्यक्ति वास्तव में शांति तभी प्राप्त कर सकता है जब वह कृष्ण को जानता हो। इसका वर्णन अगले श्लोक में किया गया है।
