श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा श्रील रूप गोस्वामी को उपदेश  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.19.111 
‘प्रेमोन्मादे पड़े गोसाञि मध्य - यमुनाते ।
प्रयागे चालाइब, इहाँ ना दिब रहिते ॥111॥
 
 
अनुवाद
तब वल्लभ भट्ट ने श्री चैतन्य महाप्रभु को आड़ैल में न रखने का निश्चय किया, क्योंकि भगवान प्रेमोन्मत्त होकर यमुना नदी में कूद पड़े थे। इसलिए उन्होंने उन्हें प्रयाग लाने का निश्चय किया।
 
Vallabha Bhatta then decided not to keep Sri Chaitanya Mahaprabhu at Adaiyal, because Mahaprabhu had jumped into the Yamuna River in a fit of love. Therefore, he decided to take Mahaprabhu to Prayag.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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