श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  2.18.99 
भट्टाचार्य तबे क हे प्रभुर चरणे ।
‘आज्ञा देह’, याइ’ करि कृष्ण दरशने!’ ॥99॥
 
 
अनुवाद
उस समय बलभद्र भट्टाचार्य ने श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणकमलों में प्रार्थना की, "कृपया मुझे भगवान कृष्ण के प्रत्यक्ष दर्शन की अनुमति प्रदान करें।"
 
Then Balabhadra Bhattacharya requested at the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu, “Please allow me to go and have a direct darshan of Krishna.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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