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श्लोक 2.18.80  |
वृन्दावने आसि’ प्रभु वसिया एकान्त ।
नाम - सङ्कीर्तन करे मध्याह्न - पर्यन्त ॥80॥ |
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| अनुवाद |
| इसलिए श्री चैतन्य महाप्रभु वृन्दावन जाते और एकांत स्थान पर बैठकर दोपहर तक पवित्र नाम का जप करते। |
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| Therefore, Sri Chaitanya Mahaprabhu would go to Vrindavan and sit in a secluded place and chant the name of the Lord till noon. |
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