लोहवन के बारे में, भक्ति-रत्नाकर (पांचवां तरंग) कहता है:
लोहवन में कृष्ण का अद्भुत गो-चरण
एथा लोह-जंघासुरे वधे भगवान्
"लोहवन में, भगवान कृष्ण गायों को चराते थे। लोहजंघा नामक राक्षस को इसी स्थान पर मारा गया था।"
महावन को भक्ति-रत्नाकर (पांचवां तरंग) में इस प्रकार वर्णित किया गया है:
देख नंद-यशोदा-आलय महावन में
एई देख श्री-कृष्ण-चन्द्र का जन्म स्थल
श्री-गोकुल, महावन - दुई 'एक' हिया
"महावन में नंद और यशोदा का घर देखें। भगवान कृष्ण के जन्मस्थान को देखें। महावन और भगवान कृष्ण का जन्मस्थान, गोकुल, एक ही हैं।"
